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विद्यालय का तुगलकी फरमान… फंस गया भविष्य


देवघरः

हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा प्रतिष्ठित विद्यालय से शिक्षा ग्रहण करें. देवघर में भी प्रतिष्ठित विद्यालयों में से एक रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ में अपने बच्चों का दाखिला कराना ज्यादातार पैरेंट्स का ख़्वाब है. यहां नामांकन के वक़्त दूर-दराज से अभिभावक अपने-अपने बच्चों को लेकर विद्यालय पहुंचते हैं. इस उम्मीद में कि उनका बच्चा प्रतिष्ठित विद्यालय रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ में पठन-पाठन कर भविष्य में बेहतर करे. लेकिन, आज अभिभावकों ने ही रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ के प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जिसकी वजह भी खास है.

देवघर स्थित रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ के परिसर में दर्जनों अभिभावक सामुहिक उपवास सह धरने पर बैठे. अभिभावकों का कहना है कि रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ के प्रबंधन समिति द्वारा क्लास दशम् के 33 छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. जो कि गलत है. जबतक स्कूल प्रबंधन उनकी मांगें नहीं मानती है तबतक वह विरोध करते रहेंगे.

♦क्या है पूरा माजरा:
रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ देवघर में एक अगस्त 2017 की रात क्लास एट और टेन के बच्चों के बीच मारपीट हुई थी. जानकारी के मुताबिक दोनों क्लास के छात्रों के बीच पहले से अनबन हो रही थी. क्लास एट के बच्चे जुनियर होने के बावजुद क्लास टेन के छात्रों से दुव्र्यवहार कर रहे थे. इसी बीच एक अगस्त को किसी बात को लेकर झड़प हुई और दोनों क्लास के छात्र एक-दूसरे से मारपीट करने लगे. जिसके बाद प्रबंधन समिति के पास बात पहुंची और समिति ने अपना निर्णय सुनाया.

♦किस बात का विरोध:
विद्यालय में एक अगस्त 2017 की रात क्लास एट और टेन के बच्चों के बीच मारपीट हुई थी. जिसके बाद छह अगस्त को विद्यालय प्रबंधन समिति ने बैठक कर निर्णय लिया. जिसमें क्लास टेन के 40 बच्चों को छोड़ तीन बच्चों को टीसी दे दिया गया और 30 बच्चों को सस्पेंड कर दिया गया. ये 30 बच्चे टेन्थ का एक्ज़ाम तो देंगे लेकिन स्कूल से पढ़ायी नहीं कर सकते हैं. जिसके बाद 33 बच्चों के अभिभावकों ने प्रबंधन के खिलाफ नाराज़गी व्यक्त की.

♦क्या कहना है अभिभावकों का:
रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ देवघर से क्लास टेन के तीन बच्चों को निष्कासित और 30 बच्चों को निलंबित करने का जो फैसला स्कूल प्रबंधन ने किया है उसका विरोध करते हुए अभिभावकों का कहना है कि जब क्लास एट और टेन दोनों वर्ग के बच्चे मारपीट में शामिल थे तो सज़ा सिर्फ 33 बच्चों को ही क्यों. अभिभावकों ने कहा कि अगर प्रबंधन सजा दे रही तो सभी को दे वरना कुछ को देना और कुछ को माफ कर देना नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है. जिन बच्चों को निष्कासित और निलंबित किया गया है उनकी परीक्षा कुछ ही महिनों में होने वाली है. ऐसे में यह बच्चे कैसे बोर्ड की परीक्षा देंगे. अभिभावकों ने बताया कि 27 अगस्त को सभी अभिभावकों ने विद्यापीठ प्रशासन से आग्रह भी किया कि छात्रों की शिक्षण स्थिती को देखते हुए निर्णय को वापस ले लें लेकिन प्रशासन ने इसपर असहमति जतायी है.

♦क्या सोच रहे छात्र:
प्रबंधन के इस निर्णय के बाद बच्चे अवसाद की स्थिती से गुज़र रहे हैं. जिसका प्रतिकूल असर इनके सेल्फ-स्टडी पर पड़ रहा है.
छात्र इस संशय से ग्रसित हैं कि शेष पूरा सत्र निलंबन के कारण क्लास उपस्थिती की जो प्रतिशतता गिरेगी उसकी वजह से कहीं सीबीएसई बोर्ड अपनी परीक्षा में शामिल होने से अयोग्य न करार कर दे.

रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ प्रबंधन के खिलाफ उपवास व धरने पर बैठे छात्रों और अभिभावकों की एक ही मांग है कि स्कूल प्रबंधन उनके बच्चों के भविष्य को अधर में न लटकायें.

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