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सिक्का लेने से इंकार करने वाले जायेंगे जेल


देवघरः

इन दिनों देवघर में लोग सिक्के को लेकर काफी परेशान हैं. बाज़ार में ऐसी अफवाह है कि सिक्के अब अवैध हो चुके हैं और अब इसका प्रचलन पूरी तरह बंद हो गया. यही वजह है कि दुकानों में सिक्के नहीं लिये जा रहे हैं. जिससे लोग खासा परेशान हैं. हालांकि ये बात पुरी तरह गलत हैं. 

बाज़ार में सिक्के के बंद होने की फैली अफवाह को लेकर उपायुक्त राहुल कुमार सिंहा द्वारा स्टेट बैंक प्रशिक्षण केन्द्र देवघर में एसबीआई के डीजीएम, एलडीएम और बैंक के वरीय पदाधिकारी के साथ बैठक की गयी. बैठक के बाद उपायुक्त राहुल कुमार सिंहा, भारतीय स्टेट बैंक के महाप्रबंधक परेश चन्द्र बारीक एवं इलाहाबाद बैंक के उपमहाप्रबंधक संदीप कुमार घोषाल द्वारा सिक्कों के प्रचलन से संबंधित संयुक्त प्रेस वार्ता की गई. 

प्रेस वार्ता के दौरान कहा गया कि विभिन्न श्रोतों के माध्यम से लगातार शिकायत आ रही है कि देवघर जिले में खुदरा बिक्रेता, व्यवसायी वर्ग व बैंक सिक्का लेना से मना कर रहे हैं. इससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. 

डीसी ने बताया कि भारत सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा निर्गत किये गये एक रूपये से लेकर दस रूपये तक के सिक्के के बंद होने की अफवाह फैली है. उपायुक्त ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है यह सिक्के सम्पूर्ण रूप से वैध हैं और बैंकर्स इसे लेने से इंकार नहीं कर सकते हैं. सभी बैंक अधिकारियों के साथ बैठक कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी ग्राहक एक दिन में एक हजार रूपये तक के सिक्के अपने बैंक खाता में जमा कर सकते हैं. 

साथ ही सारे संस्थान वाल, चाहे वह छोटे दुकानदार हो या बड़े जहां पर वित्तीय लेनदेन होता है. उनसबों की भी जिम्मेवारी है कि सिक्कों की लेनदेन में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतें. अगर वे सिक्के नहीं लेते हैं तो यह भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराध है और धारा 124ए के तहत इसे देशद्रोह की संज्ञा में भी लाया जा सकता है. इसमें तीन साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. 

डीसी ने जिलेवासियों से यह अपील किया है कि सिक्कों के लेनदेन में तत्परता लायें, ये सिक्के सम्पूर्ण रूप से वैध है. जितना ज्यादा ये सिक्के बाजार में प्रचलन में रहेंगें. उतना ज्यादा यहां की इकाॅनोमी बढ़ेगी.

मुख्य बिंदुओं पर चर्चाः-

1. कोई भी ग्राहक बैंकों में एक रुपये का सिक्का जमा कर सकते हैं. एक दिन में इन सिक्कों को जमा करने की उपरी सीमा 1,000 रुपये है.

2. आवश्यकतानुसार बैंकों द्वारा ग्राहक को सिक्का के रूप में भी भुगतान किया जा सकता है.

3. सिक्के कानूनी निविदत्त हैं और वित्तीय लेन-देन एवं भुगतान हेतु इसका प्रयोग किया जा सकता है.

4. सभी बैंकों, वित्तीय संस्थानों, दुकानदारों, खुदरा विक्रेताओं, थोक व्यापारियों, एवं सामान्य जनता को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गये नियमों का पालन करना चाहिए और सभी सिक्कों को कानूनी निविदा के रूप में स्वीकार करना चाहिये.

5. सिक्कों को अस्वीकार करना या रिफंड करना कानून के तहत दंडनीय अपराध है.

6. कोई भी संगठन जो राष्ट्रीय प्रतिष्ठा, प्रतीक, गान आदि को अपमानित करता है. वह देश द्रोही की श्रेणी में आता है.

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