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जींदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी


जामताड़ाः

कहते हैं दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता. छह अगस्त को चारों ओर फ्रेंडशिप डे की चर्चा हो रही थी. एक दोस्त दूसरे दोस्त से साथ जीने मरने की कसमें खा रहे थे. लेकिन इस वादे को जामताड़ा के विद्यासागर गांव के मुस्लिम बस्ती में दो दोस्तों ने पूरा किया है. जो जिंदगी के साथ भी साथ रहे और जिंदगी के बाद भी साथ रहेंगे. इनकी दोस्ती की चर्चा पूरे इलाके में है. 
जामताड़ा जिले के विद्यासागर के मुस्लिम बस्ती में बनुल मियां और अल्लाउद्दीन मियां की दोस्ती आज खुब चर्चे में हैं. एक दूसरे की जान बनुल और अल्लाउद्दीन मियां में से जब अल्लाउद्दीन मियां को यह खबर लगी कि उनका सबसे अज़ीज बनुल मियां उन्हें छोड़ कर हमेशा के लिए चला गया है. तो इस सदमे को वह बर्दाश्त नहीं कर पाये. बनुल मियां की मौत की खबर सूनते ही अल्लाउद्दीन मियां तड़पने लगे और कुछ ही पलों में उनकी भी रूह निकल गयी. 
बता दें कि विद्यासागर गांव के दो दोस्त अल्लाउद्दीन मियाँ और बनुल मियां रिश्ते में ममेरे-फुफेरे भाई थे. लेकिन इनके लिए रिश्तेदारी से बढ़कर इनकी दोस्ती थी. जो बचपन से लेकर आज बुढ़ापे तक कायम रही. आखिरी वक्त में भी दोनों ने क्या खूब दोस्ती निभायी. गांव वालों ने बताया कि दोनों भाई कम दोस्त एक साथ कारोबार भी करते थे. हर खुशी और गम दोनों एक साथ मिलकर बांटते थे. तो जिंदगी का आखिरी वक्त कैसे न बांटते. दोनों दोस्तों के जनाजे में पहुंचे लोगों की जुबां पर बस इनकी दोस्ती की ही चर्चा हो रही थी. 

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