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क्या तीन साल में भी पूरा नहीं होता है सिंचाई कूप!


देवघर/सारठ (अनुज भोक्ता): 

केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना में नियम-कानून को ताक पर रख कर भारी अनियमितता बरती जा रही है. प्रशासन के लाख प्रयास के बावजूद योजनाओं में पूर्ण रूप से बिचैलिया हावी है. सरकार मनरेगा योजना के तहत किसानों को सिंचाई कूप देती है, ताकी किसान कूप से पटवन कर बंजर भूमी पर फसल लगा पायें. लेकिन सरकारी तंत्र व जनप्रतिनिधि की उदासीनता के कारण एक सिंचाई कूप तीन साल में भी नहीं बन पाता है.

यह हाल है देवघर जिले के सारठ प्रखंड के जमुवासोल पंचायत के भुईयाडीह गांव का. जहां वर्ष 2013-14 में लाभूक गोणो महतो के नाम से एक सिंचाइ कूप स्वीकृत हुआ. सिंचाई कूप का प्राक्कलन दो लाख 97 हजार है. कूप में 15 जून 2016 तक दो लाख 59 हजार भुगतान भी हो चुका है. लेकिन इस कूप को देखने से ही पता चलता है कि सिंचाई कूप करने का उद्देश्य पटवन करना नहीं सिर्फ ठेकेदारी करना है. कूप की जोड़ाई लगभग 20 फिट हो गई है. लेकिन कूप में मात्र एक फिट पानी है. सिंचाई कूप को आधा-अधुरा ही छोड़ दिया गया है.

 

                                  \"dobha\"

                                                                             अधुरा सिंचाई कूप 

क्या कहते हैं गोणो महतोः
लाभूक गोणो महतो एक सिधे-साधे मजदूर हैं. उन्हें पता भी नहीं किस तरह मनरेगा से कूप कराया जाता है. गोणो महतो ने बताया कि गांव के ही एक व्यक्ति ने उन्हें जानकारी दी कि तुम्हारे जमीन में सरकारी सिंचाई कूप बनवा देंगे. गोणो ने सोचा कि अगर सिंचाई कूप बन जायेगा तो जमीन पर साग-सब्जी लगाकर कुछ आमदनी बढ़ायेंगे. लेकिन उनकी उम्मीद पर पानी फिर गया. बिचैलिये ने कूप को आधा-अधुरा ही छोड़ दिया.

क्या कहती हैं बीडीओ:
सारठ प्रखंड की बीडीओ निशा कुमारी सिंह ने कहा कि तीन साल से सिंचाई कूप लंबित रहना गंभीर मामला है. कूप के अभिलेख की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. 

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