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..... और मिट गई उस्ताद की आखिरी निशानी

....कल चमन था आज एक उजड़ा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ....कुछ ऐसे ही हालात हो गए हैं उस्ताद की आखिरी निशानी की, जो अब कुछ में दिनों मिट जाएगी। जिस मकान में देश-दुनिया के कलाकारों की स्वर लहरियां गुंजती थी, सामूहिक तौर पर पांच समय का नमाज अदा हुआ करता था, जिस मकान की दरों दीवारों में उस्ताद की यादें रची बसी थीं, उसका अस्तित्व चंद दिनों का मेहमान है। हम बात कर रहें भारत रत्न शहनाई नवाज उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के बारे में जिन्हें बनारस और गंगा से इतना प्यार था कि उन्होंने विदेश में बसने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था। वैसे रत्न की धरोहर अब अतीत खो जाएगा। 

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